पिछले साल 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय सेना की अभूतपूर्व कार्रवाई से पस्त हुआ पाकिस्तान अब अपनी खोई हुई साख बचाने के लिए चोरी-छिपे अपनी सैन्य शक्ति को दोगुना करने में जुट गया है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान अब केवल पारंपरिक हथियारों पर निर्भर नहीं है, बल्कि वह चीन, तुर्की और कुछ यूरोपीय देशों जैसे इटली और स्विट्जरलैंड से घातक एयर डिफेंस तकनीकें हासिल करने की कोशिश कर रहा है।
'ए हेड एम्युनेशन' और UCAVs का जखीरा
पाकिस्तानी सेना अब 'ए हेड एम्युनेशन' (AHEAD Ammunition) जैसा एडवांस सिस्टम खरीदने की तैयारी में है, जो हवा में ही दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों के परखच्चे उड़ाने में सक्षम है। इसके अलावा, इस्लामाबाद ने तुर्की से Akinci और चीन से CH-4 व CH-5 जैसे कुल 31 आधुनिक मानवरहित युद्धक विमान (UCAVs) खरीदने का सौदा किया है। इनमें से कुछ ड्रोन्स की मारक क्षमता हजारों किलोमीटर तक बताई जा रही है, जो सीधे तौर पर भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है।
चीन की 'नोरिन्को' के साथ आर्टिलरी डील
भारतीय सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान ने चीनी रक्षा फर्म 'नोरिन्को' के साथ मिलकर अपनी तोपखाना क्षमता को बढ़ाने के लिए SH-15 सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर तोपों का बड़ा ऑर्डर दिया है। हालांकि पाकिस्तान इन्हें अफगानिस्तान सीमा पर तैनात करने का दावा कर रहा है, लेकिन इसकी 55 किलोमीटर की रेंज और 90 किमी/घंटा की रफ़्तार इसे पहाड़ी इलाकों में भारत के खिलाफ एक घातक हथियार बनाती है।
समुद्र में 'लायन स्टार' युद्धाभ्यास
थल सेना के साथ-साथ पाकिस्तान नौसेना भी हिंद महासागर में सक्रिय हो गई है। हाल ही में श्रीलंका के साथ 'लायन स्टार V' युद्धाभ्यास में पाकिस्तान के दो आधुनिक युद्धपोत—PNS तैमूर और PNS असलात—ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत के समुद्री प्रभाव को चुनौती देने और पड़ोसी देशों को भड़काने की एक सोची-समझी चाल है।
मलेशिया डिफेंस एक्सपो (DSA 2026) में भारत की नकल
खुद को 'आत्मनिर्भर' दिखाने की होड़ में पाकिस्तान ने मलेशिया में चल रहे DSA 2026 डिफेंस एक्सपो में अपना स्टॉल लगाया है। भारतीय रक्षा निर्यात की सफलता को देखते हुए, पाकिस्तान भी अब एक मेजर जनरल के नेतृत्व में अपनी टीम भेजकर दुनिया को हथियार बेचने का ढोंग कर रहा है। हालांकि, भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पाकिस्तान की इन हरकतों पर पैनी नजर रखे हुए हैं।